प्रदोष व्रत में पड़ने वाले दिन का होता है ख़ास महत्व ,जाने प्रदोष व्रत के नियम व लाभ
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प्रदोष व्रत में पड़ने वाले दिन का होता है ख़ास महत्व ,जाने प्रदोष व्रत के नियम व लाभ

हिंदू धर्म में कई व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं, जिनमें से प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए रखा जाता है। हालाँकि प्रदोष व्रत किसी भी दिन रखा जा सकता है, लेकिन हर दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत से जुड़ी खास मान्यताएं हैं। आप अपनी श्रद्धा और मनोकामना के अनुसार किसी भी दिन प्रदोष व्रत रख सकते हैं।  आइए जानते हैं कि प्रदोष व्रत क्या है, इसे कैसे रखा जाता है और इसके क्या लाभ हैं।

प्रदोष व्रत क्या है?

प्रदोष का अर्थ होता है – “त्रयोदशी तिथि के शाम का समय।” हिंदू कैलेंडर के अनुसार, हर महीने में दो बार, कृष्ण पक्ष (चंद्रमा के घटते चरण) और शुक्ल पक्ष (चंद्रमा के बढ़ते चरण) में त्रयोदशी तिथि आती है। उसी दिन, शाम के समय को प्रदोष काल कहा जाता है और इसी काल में प्रदोष व्रत रखा जाता है।

प्रदोष व्रत कैसे रखें? 

संकल्प: सुबह सूर्योदय से पहले उठें और स्नान करके व्रत का संकल्प लें. भगवान शिव का ध्यान करें और व्रत को सफलतापूर्वक पूरा करने का संकल्प लें।
सात्विक भोजन: पूरे दिन सात्विक भोजन करें। इसमें फल, सब्जियां और दूध आदि शामिल हैं। मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।इसके साथ ही प्रदोष व्रत में नमक भी नहीं खाया जाता है यानि की आपको सिर्फ मीठा खाना होता है।
शिव पूजा: शाम के समय प्रदोष काल में स्नान करके साफ कपड़े पहनें। फिर शिव मंदिर जाएं या घर पर ही शिवलिंग की स्थापना करें। शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, दूध, दही, धतूरा और भांग चढ़ाएं। शिव मंत्रों का जाप करें और आरती करें।
रात्रि जागरण (Optional): आप चाहें तो रात भर जागरण भी कर सकते हैं और भगवान शिव की भक्ति में लीन रह सकते हैं।
पारण: अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करें। शिवलिंग का जलाभिषेक करें और फिर फलाहार ग्रहण करें।

प्रदोष व्रत के लाभ:

प्रदोष व्रत रखने के कई लाभ बताए गए हैं, ऐसा माना जाता है कि प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है।ये भी कहा जाता है कि सच्चे मन से प्रदोष व्रत रखने से आपकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और सुखी जीवन: की प्राप्ति होती है। यह व्रत आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि ला सकता है। कुछ लोगों का मानना है कि प्रदोष व्रत रखने से स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है।

आइए जानते हैं हर दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत के नाम और उनसे जुड़ी मान्यताओं के बारे में:

रवि प्रदोष व्रत (Ravi Pradosh Vrat): जैसा कि हमने पिछले लेख में बताया, रवि प्रदोष व्रत रविवार (Sunday) को पड़ता है। इसे सबसे शुभ प्रदोष व्रतों में से एक माना जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ सूर्य देव का भी आशीर्वाद मिलता है, जो आपको सफलता, धन-धान्य और स्वास्थ्य प्रदान कर सकता है।

सोम प्रदोष व्रत (Som Pradosh Vrat): यह व्रत सोमवार (Monday) को पड़ता है। मान्यता है कि इस दिन प्रदोष व्रत रखने से मनचाही इच्छाएं पूरी होती हैं। भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों को मनोरथ प्रदान करते हैं।

मंगल प्रदोष व्रत (Mangal Pradosh Vrat): मंगलवार (Tuesday) को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को मंगल प्रदोष व्रत कहते हैं। इस दिन व्रत रखने से मंगल ग्रह का प्रभाव शुभ होता है। साहस, शक्ति और भूमि संबंधी कार्यों में सफलता मिलती है।

बुध प्रदोष व्रत (Budh Pradosh Vrat): बुधवार (Wednesday) को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को बुध प्रदोष व्रत कहते हैं। यह व्रत बुद्धि, विवेक और संतान प्राप्ति के लिए शुभ माना जाता है।

गुरु प्रदोष व्रत (Guru Pradosh Vrat): गुरुवार (Thursday) को पड़ने वाला प्रदोष व्रत गुरु प्रदोष व्रत कहलाता है। इस दिन व्रत रखने से गुरु ग्रह का आशीर्वाद मिलता है। शिक्षा, ज्ञान और गुरुओं का सान्निध्य प्राप्त होता है।

शुक्र प्रदोष व्रत (Shukra Pradosh Vrat): शुक्रवार (Friday) को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। यह व्रत भौतिक सुख, वैभव और सौंदर्य प्रदान करने वाला माना जाता है।

शनि प्रदोष व्रत (Shani Pradosh Vrat): शनिवार (Saturday) को पड़ने वाला प्रदोष व्रत शनि प्रदोष व्रह कहलाता है। इस दिन व्रत रखने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है। शनि के प्रकोप से बचाव और जीवन में स्थिरता लाने के लिए यह व्रत शुभ माना जाता है।

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